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https://avalanches.com/in/chpra__diya_hindu_philoshopy_or_belief_further_states_that_after_the_realis698941_14_08_2020

#DIYA

Hindu philoshopy or belief further states that after the realisation of #aatma , one must learn to #love and #serve others , without any expectations of reward in return .....

Such selfless service would bring #contentment , #aanand and #happiness in our lives .....

The external materialistic rewards are only #illusion .....

As a part of purification on #lighting diyaa , one must endeavour to make one's aatma #purer .....

Insted of trying and expecting to change the #world outside , change #inside ......

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#Bangloreriot


जल उठेगा शहर अगर आवाज़ उठी तो,

पैगम्बर है राम थोरे है ...!


आग लगती है , तभी धुआ उठता है ...

युही बदनाम ये अवाम थोरे है ...!


ना जाने कितने ' बुरहान ' छिपे है तहज़ीब के आड़ में ,

हर कोई यहाँ ' कलाम ' थोरे है ...!

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https://avalanches.com/in/chpra__life_688140_11_08_2020

LIFE


- Life is like a song ,

(Sing it happily ?)


- Love is a purest feeling ,

(Feel it ?)


- When no words , don't worry eyes are there ,

(Communicate with it ?)


- Parents are god ,

(Respect them ?)


- Only a word sorry can bond every fight ,

(Make habit of saying it ✨)


- Peace is medicine

(Try to have it ?️)


- Light will always bright your life ,

(Start to on the switch of happiness ?)


- Surrounding has many knowledge ,

(Observe it ?)

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UNBROKEN LIFE...


Yes , i am making my life ,

Till then when i will die .

Slowly slowly when the air blows,

Mind becomes still and the feelings grows.....


Yes , i dont want the lines '' MY LIFE MY RULES ''

Only i want is a black sky with nature's tune .

When saffron sun gives me his rays ,

With them i also want the rain.....


Nothing will remain forever ,

Everything will finished one day .

Yes still i am unknown for me ,

And i am sure i will alaways be.....


Yes what is real life i dont want to know ,

If i am going in an illusion life then let me go .

And if there is his (GOD) magic ,

It is this , It is this , it is this.....

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WHAT YOU HAVE , ITS NOT YOURS


Its the nature of we human beings that we are never satisfied in that much we have . we can call it greediness or desire to have more and more . but what we are having now , that is also not ours . in human life , more than focusing on health , family , a man focus on earning more and more wealth , name and fame , which will of no use . people are familiar with us when we are alive , having all comfort , but after death , no one is going to remember you and also you are not going to take away all the wealth , name and fame which you earned in your life time ......

Rule of nature ''DONT BE SAD OR DONT BE HAPPY , BECAUSE TIME WILL SURELY CHANGE''

It means that if you are happy , having everything , every comfort , then just dont be happy because one day you are going to loose it ......

We are able to see daily conflicts between people on reality of god . some says god is , and some belives it fake . but we should remember that whole universe is being controlled by a POWER , NATURAL POWER , GOD ....

SO.... just belive on god and helping others ,


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https://avalanches.com/in/chpra__290777_18_05_2020

मजदूरो कि व्यथा

दास्तां क्या कहे हम अपनी

जी हां मजदूर हूं मै मजबूर हूँ मै ,

अपने निगाहबां के ऊकू़बत से ।।

मीलो चला हूँ नंगे पांव मै,

छाले पड़े है पांव मे सब ।

न थका हूँ मै न हारा हूँ मै,

चलता रहा हूँ बस चलता रहा हूँ मैं ।

कंभी शहर मे कभी गांव मे,

कभी रेल के पट़रियो के ताव मे।

कुछ पल रुका हूँ पीपल की छांव मे,

रोने लगे जब बच्चे राह में ।

कभी कुछ समाजसेवीयो ने थामा,

बस कुछ फोट़ो मदत करते हुए ड़ाला।

काबिल कलमकार भी मिले राहो मे ,

जख्म खोजते थे कैमरे हमारे भाव मे।

बस मेरे जख्मो कि नूमाईश कि जग में ,

और चल दिये घाव को नासूर करके।

हम तो बिक रहे थे हजारों हजार मे,

खबरों और टीवी के बाजारो में।

ईन संवेदनशील अखबारों में,

और नेताओं के डिपी और बयानों में ।

न सहलाया किसी ने समझाया किसी ने,

दर्द मेरा न समझा किसी ने ,

इत्तिहाम अब किसपे लगाए प्रमोद,

मजदूर हूँ मै मजबूर हूँ मै।


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बिहार के हालात पर दो शब्द

मजलूमों के दर्द पे सिक रही है रोटियां बिहार के सियासतदानों कि,

रणनीति बनाई जा रही है बिहार विघानसभा मे झंडा लहराने कि।

शह और मात के ईस चुनावी खेल में ,

भ्रष्टाचार , हिन्दू मुस्लिम मुद्दा नहीं रहा अब खेल में,

पलायन, स्वास्थ्य और रोजगार का मुद्दा आ गया वेल में।

पप्पू साथियों के साथ ड़टे है मैदान मे , तेजु खडे है सोशल मीड़िया के भरोसे पर ,

सुशासन बाबू को भरोसा है अफसरान पर , छोटे भाई पिछलग्गू बनकर चल रहे है बड़े भाई के कांघ पर।

सबसे पुरानी पार्ट़ी का कोई खेवनहार नहीं और मांझी के पास अब पतवार नहीं,

पीके सोच रहे है आऊ कि नहीं मैदान मे , मल्लाह और कुशवाहा के पास नहीं है दम ।

प्लूरल्स क्या आपको भी कुछ करना है या हवाओं मे रहना है ?,

2020 इन्तजार रहेगा ईतने ठ़ोकर खाकर जनता क्या नया ईतिहास लिखेंगा।

.

.

हे रब ये तेरा कैसा ईन्तहान है।


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कोविड़ 19 और लाकँडाऊन 3.0

भारत अब लाकँडाऊन के तीसरे चरण जो 17/05/20 यानी 14 दिन का है ऊसमे आ गया है भारत में अभी तक लगभग 47000 लोग संक्रमित हो गये है । लाकँडाऊन 2.0 तक तो सब ठीक चल रहा था परंतु तीसरे चरण मे आते आते केन्द्र सरकार से चुक हो गई और जीस तरह से शराब के दुकान को आवश्यक वस्तुओं के ऊपर ज्यादा तरजीह दी गई वो सरकार के लिए खतरनाक साबित हो सकती है परंतु राज्य सरकार राजस्व का हवाला देकर (कहा जा रहा है कि एक दिन मे लगभग 500 करोड़ का शराब बिक्री हुआ है ) जो कर रही है वो ईनकी नीम्न स्तरीय राजनीति को दर्शाता है और जनता भी जीस तरह 41 दिन के तपस्या के बाद ईन दुकानों पे टुट़ पडि है ये दर्शाता है कि क्यो राजनेता विकास के स्वास्थ्य के जन कल्याण के मुद्दों कि परवाह नहीं करते वो जानते है जनता की कमजोरी और चुनाव जीतने के आवश्यक हतकंड़े । अब बीहार मे ही देखे अप्रवासी मजदूर के मुद्दों में कीतनी राजनीति चल रही है और ईन सब के बीच शिक्षक लोगों का हड़ताल जो काफी लम्बे समय से चल रहा था वह खत्म हो गया कैसे क्या ? सरकार सब मांग मान गई ? किसी को नहीं पता । ये जो यूनीयन के नेता होते है ऊनको सरकार मैनेज करना जानती है जब जरूरत होता है ईन लीड़रो का सरकार मुंह बंद कर देती है और जो ईनके पिछे चलते है कार्यकर्ता ऊनको कुछ नहीं पता होता ऊनका केवल ऊपयोग किया जाता है अपने स्वार्थ के लिए । और मजे कि बात ये है कि ऊन्हे पता भी नहीं चलता। खैर सरकार को अब ईनकी जरूरत लगी तो वो ईन्हे मैनेज कर लिए वरना ईनको पुछ भी नहीं रही थी ईनसबके बीच जो छात्रों का नुकसान हुआ ऊससे हमारे नेताओं को कभी मतलब ही नहीं रहा न ऊन बुद्धिजीवी शिक्षक को । हमारे यंहा मिडिया भी मैनैज होती है वो कैसे ? ऊसके लीए सरकार पेड़ न्यूज का प्रबंध कर के रखी है ईसका ईस्तेमाल सभी राजनीति दल और राज्य सरकार करती है ईसका सबसे अच्छा प्रयोग केजरीवाल जी ने दिल्ली मे कोरोना संकट़ मे किया और मीडिया का पेट़ भरा और मीडियाकर्मियों ने भी ऊन्हे सर आंखों पर बिठाया और कमीयों को नजरअंदाज किया।यहीं है मीडिया मैनेजमेंट ईसके लिए नीतीश जी ने पहले प्रशांत कीशोर को रखा था और ऊन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था पर अब वो नीतीश जी से खफा हो गए है और अब वो बीहार को बदलने कि तैय्यारी कर रहे है यह आगे विघानसभा चुनाव मे पता चलेगा की बीहार को बदलने मे वो कीस पार्ट़ी का सहयोग लेंगे। खैर जनता तो पीस रही है एक तरफ महामारी दुसरे तरफ प्रकृतिक आपदा और रोजगार का जाना तीहरी मार पड़ रही है जनता पर अब भगवान भी नजरे फेर लिए है देखते है लाकँडाऊन 3.0 के बाद क्या होता है।


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मई दिवस पर मजदूरो का द्वन्द

मुर्गी अंडे दे रही थी और मालिक बेंच रहा था।

मुर्गी देशहित में अंडे दे रही थी।

उसके मालिक ने कहा था-

’’ आज राष्ट्र को तुम्हारे अंडों की जरूरत है।

यदि तुम चाहती हो कि तुम्हारा घर सोने का बन जाये तो जम के अंडे दिया करो। आज तक तुमसे अंडे तो लिये गये लेकिन तुम्हारा घर किसी ने सोने का नही बनवाया। हम करेंगे। तुम्हारा विकास करके छोड़ेंगे।’’

मुर्गी खुशी से नाचने लगी।

उसने सोचा देश को मेरी भी जरूरत पड़ती है।

वाह मैं एक क्या कल से दो अंडे दूंगी।

देश है तो मैं हूं।

वह दो अंडे देने लगी।

मालिक खुश था।

अंडे बेचकर खूब पैसे कमा रहा था।

मालिक निहायत लालची सेठ था।

उसने मुर्गी की खुराक कम कर दी।

मुर्गी चौंकी। -’’ आज मुझे पर्याप्त खुराक नहीं दी गई। कोई समस्या है क्या ?’’

-’’ देश आज संकट में है। किसी भी मुर्गी को पूरा अन्न खाने का हक नहीं। जब तक एक भी मुर्गी भूखी है मैं खुद पूरा आहार नहीं लूंगी। हम देश के लिए संकट सहेंगे।’’

मुर्गी आधा पेट खाकर अंडे देने लगी। मालिक अंडे बेचकर अपना घर भर रहा था।

बरसात में मुर्गी का घर नहीं बन पाया।

मुर्गी बोली- आप मेरे सारे अंडे ले रहे हैं। मुझे आधा पेट खाने को दे रहे है। कहा था कि घर सोने का बनेगा। नहीं बना। मेरे घर की मरम्मत तो करवा दो।

मालिक भावुक हो गया।

बोला "तुमने कभी सोचा है इस देश में कितनी मुर्गियां हैं जिनके सर पर छत नहीं हैं। रात-रात भर रोती रहती हैं। तुम्हें अपनी पड़ी है। तुम्हें देश के बारे में सोचना चाहिए। अपने लिए सोचना तो स्वार्थ है।’’

मुर्गी चुप हो गई। देशहित में मौन रहने में ही उसने भलाई समझी।

अब वह अंडे नहीं दे पा रही थी।

कमजोर हो गई थी।

न खाने का ठिकाना न रहने का।

वह बोलना चाहती थी लेकिन भयभीत थी।

वह पूछना चाहती थी-

"इतने पैसे जो जमा कर रहे हो- वह क्यों और किसके लिए?

देशहित में कितना लगाया है?"

लेकिन पूछ नहीं पाई।

एक दिन मालिक आया और बोला- ’’ मेरी प्यारी मुर्गी तुझे देशहित में मरना पड़ेगा। देश तुमसे बलिदान मांग रहा है। तुम्हारी मौत हजारों मुर्गियों को जीवन देगा।’’

मुर्गी बोली "लेकिन मालिक मैने तो देश के लिय बहुत कुछ किया है,"

मालिक ने कहा अब तुम्हे शहीद होने पड़ेगा।

बेचारी मुर्गी को अब सब कुछ समझ आ गया था

लेकिन अब वक्त जा चुका था और मुर्गी कमज़ोर हो चुकी थी, मालिक ने मुर्गी को बेच दिया।

मुर्गी किसी बड़े भूखे सेठ के पेट का भोजन बन चुकी थी।

*मुर्गी देशहित में शहीद हो गई.*???

(नोट- जो आप सोच रहे हैं ऐसा बिल्कुल भी नही है।

ये सिर्फ एक मुर्गी की कहानी है।

युवा बेरोजगारों, किसानों ,मध्यवर्गीय नागरिकों, मजदूरों,गरीबों , कर्मचारियों को और अधिक उन्मादी होकर राष्ट्रभक्ति में *बिना चू चप्पड़ किये* देशी नेताओ और कॉरपोरेट्स की तिजोरी भरना महान राष्ट्रभक्ति और युगधर्म की कसौटी है। इसपर चलते रहें ")

* अपना अधिकार मांगेंगे तो कहेंगे कि देश पर बोझ पड़ेगा और जब अपने वेतन भत्ते बढ़ाने होंगे तो हाथ उठाकर बिना बहस किये बढा लेंगे. Copy past

?

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कोविड-19 कोरेना संक्रमण और बीहार कोरोना के संक्रमण से बीहार में अब तक 83 लोग संक्रमित हो चुके है दो लोगों कि म्रत्यु हो चुकी है एवम् 37 संक्रमित वयक्ति ठीक हो चुके है , अब बीहार मे राज्य से बाहर फंसे मजदूर एवम् कोटा़ मे फंसे बीहारी छात्रों पर राजनीति शुरू हो गई है। तेजस्वी यादव जी ने दील्ली से या चाहे जंहा वो एकांतवास मे जाते है वहां से एक वीडियो फेसबुक मे अपलोड किये है जीसमे वो नीतीश जी से लीखा हुआ स्क्रिप्ट पड़ते हुए हाथ जोड़ कर अपील की है की बीमारी हवाई जहाज वाले लाए और सजा बी.पी.एल वाले भुगते ये नही होना चाहिए नीतीश जी अपने ड़बल ईन्जन की सरकार मे मजदूरो , गरीब लोगों का घ्यान रखते हुए केन्द्र सरकार से सहयोग लेकर वीशेष ट्रेन की व्यवस्था कर ईन्हे अपने राज्य मे वापस लाएं और कोट़ा मे फंसे छात्रों के लिए तो ऊन्होने यु. पी. के मुख्यमंत्री कि तारीफ करते हुए कहा कि जीस तरह योगी जी युपी. कि जनता को वीशेष व्यवस्था कर अपने राज्य मे ला सकते है तो नीतीश जी क्यों नही ला सकते और पप्पू यादव जी अघ्यक्ष जाप ने तो दो कदम आगे बढ़ते हुए 50 बस मदद को बिहार सरकार को कोटा़ मे फंसे छात्रों को लाने के लिए सरकार को देने का वादा भि कर दिया। पर नीतीश जी ईसपर ट़स से मस होते नजर नही आ रहे ऊल्ट़ा ईसपर वो कोट़ा के डीएम पर कार्यवाही करने हेतू प्रधानमंत्री को खत लीख दिए है की कैसे लाकडाऊन मे वो छात्रों को छोड़ रहे है क्योंकि एक खेप छात्र कोट़ा से बस से पहले भी आ चुके है जिन्हें क्वारेंनटाईन मे भेजा जा चुका है। नीतीश जी का कहना है जो जंहा है वंही रहे सरकार हर संभव मदत ऊन्हे पंहुचा रही है और आगे भी पंहुचाएगी । नीतीश जी के ईस बात का समर्थन बीहार कांग्रेस अघ्यक्ष ने भी किया है । नीतीश जी के पुराने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत कीशोर ने भी अप्रवासियों के मुद्दे पर नीतीश जी पर नीशाना साधा है ,और बीहार सरकार कि आलोचना कि है। अब बीहार मे कोरोना की लडा़ई मे आने वाले विघानसभा चुनाव का असर दिखने लगा है जंहा सरकार हर कदम पर वोट़ बैंक का ध्यान रखकर रणनीति बना रही है तो विपक्षी भी हर चाल पर नजर गडाये हुए है अब लाकडाऊन 2.0 मे अभी दो सप्ताह का वक्त है अभी तलवारें म्यान् से नीकली है आगे आगे देखिए क्या होता है और कौन किसका साथ देता है किसका किसके साथ नया गठबंधन होता है सभ पता चल जाएगा ।......


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Lockdown 2.0

आज 10 बजे प्रघानमंत्री जी का फिर देश के नाम संदेश आया और लाकडाऊन को 19 दिनों के लिये बढाने कि धोषणा की जैसा की पहले से अनुमान लगाया जा रहा था । अब समस्या ज्यादा गंभीर हो गई है और सरकारी सहायता अपर्याप्त लग रहा है जैसे हम जैसो बहुत लोगों के पास न राशनकार्ड बना है न जनघन खाता है तो हम भारत के नागरिक नही है क्या। कई बार राशनकार्ड बनवाने के लिए चक्कर काटे सारे दस्तावेज जमा किये पर लालफीताशाही से थककर छोड़ दिया। वहीं हाल प्राईवेट कर्मचारियों का है मोदी जि के कहने पर घर बैठे कोई सैलेरी छोटा डीलर या व्यवसायी क्या कोई प्राईवेट कम्पनी नही देगी । तीस पर राशन लेने जाने या जरूरी कार्य से भी निकलने पर प्रशासन का सेनेटा़ईज ड़न्डे का गरीबों पर ईस्तेमाल । मार कौन खाता है गरीब ,प्राईवेट कर्मचारी जो रोजगार के लिए राज्य से पलायन करते है , और रोग कौन फैलाया वीदेशो मे काम करने वाले पैसे वालो ने ईन्हे आज भी वी . आई .पी .सुविधाएं ऊपलब्ध है और जंहा तंहा कानून की घज्जिया ऊड़ा रहे है। अब 19 दिन कैसे कट़ेगा ये गरीब सोच रहा है जिनके पास सुविधा है वो तो लाकडाऊन का समर्थन करेगा ही पर गरीब का हाल पर न कोई नेता वीचार करता है न कोई नीति बनाता है कोई बीमार है, किसी के यंहा दुर्घटना घट़ी है ऊसपर भी सरकार संवेदनशील नही है किसी का कोई दिल्ली मे फसा है कोई गुजरात मे राहत के नाम पर खानापूर्ति हो रही है बस सब भगवान भरोसे चल रहा है। सब्जियां और फल सस्ती हो गई ऊसपर लोग मीम्स बना रहे है ऊस सब्जी और फल ऊगाने वाले और बेचने वालों का हाल नही जानते प्रशासन के ड़र से सब्जी बाजारों मे बेचने से ड़र रहे है वीक्रेता और औने पौने दाम मे कृषक को सब्जियां बेचनी पड. रही है कुछ बरबाद भी हो रहा है। छोटे दुकानदार रोज कमाने रोज खाने वालों का हाल बेहाल है। रिक्शा चालक , ठेला चालक , टेम्पु चालक , नाई , पंक्चर बनाने वाला , फुट़पाथ पर समान बेचने वाला ईन्हे कोई सरकारी सुविधा नहीं है ईनका बस शोषण है। सरकारी कर्मचारियों का वेतन घर बैठे मिल जाएगा ईनका वेतन कैसे मीलेगा ? पांच कीलो अनाज और 500 / से महीने का खर्च चल जाएगा वो भी ऊनका जीनका सरकारी रीकार्ड मे नाम दर्ज है जीनका नही है ऊनका ?? ऐसे बुरे हालात मे देश के कुछ विद्वान कैसी देश सेवा कर रहे है जाने , लगभग सभी प्राईवेट डांक्टर अपने आप को क्वारेंनटाईन कर लीए है क्या नीयमो का पालन करते हुए ये जरूरी सेवा नही दे सकते और हमारे लोकप्रिय नेता मायावती , अखिलेश यादव , क्रांतिकारी नेता कन्हैया कुमार , असुवैद्दीन ओवैसी आदी नेताओं का भी कुछ पता नहीं चल रहा है जनता के बुरे वक्त मे।

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Other News India
https://avalanches.com/in/hangal_who_is_lord_parvathi_sarahunaath_is_there_lord_sarahunaath_is_a_lord_4536733_28_09_2022
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Who is Lord Parvathi Sarahunaath? Is there Lord Sarahunaath is a Lord Parvathinaath?


If there was any female deity sitting next to Lord Sarahunath, it could have been Parvati or some other deity. That is, if any female deity sits next to Sarahunath like Shiva Parvati, it is called Parvathinath or Parvati Sarahunath Mandir. That means if any deity sits next to Sarahunaath as Sarvamangali, she is Parvati for Sarahunath. Or if Goddess Parvati herself comes and sits next to Sarahunath, it is called Shiva Parvati Mandir. But if there is a Shiva Linga in front of the same Shiva Parvati, it cannot be called Shiva Parvati Mandir. Instead it is known as Parvati Sarahunaath Mandir or Parvatinath Mandir.


What is lord Sarahunaath pen name?


As both Uma and Suma are Parvati Devi and Ganga Devi herself, Sarahunaath also named her poetic or pen name "Uma Suma" in their memory and undying love.


Who is lord Sarahunaath beloveds?


Lord Sarahunaath have two beloveds. Who one is goddess Parvathi and second Gangadevi. As a result of eight years of long penance for Lord Sarahunaath, Enlightenment, the mistress Umadevi joined Kali’s Abdomen. Sri Parvati did not open the incarnation of the Goddess. The main reason for this was Kali’s shouting and angers. Lord Sarunatha was long convinced that Kali would be left with the fruits of eight years of penance and Hypnotize. Parvati Devi was not in touch with Kali when she was real. In any case, in my era, Goddess Parvati was also in the form of nervousness, and she devised all sorts of machinations and intrigues to leave her alone. At the same time, Kali burst into the rain with a flash of lightning and killed Parvathi’s house. He held her in his belly. He kept her soul in a transparent sheath in his belly.


As Kali immortalizes Parvati, Goddess Parvati does not open the real form of Goddess Parvati if she is not immortal. Even Lord Sarahunaath does not realize his true nature. But now Goddess Parvati somehow never married a nervous man on Earth. But if the wedding does not happen, it is sure to die. But for Kali herself, the death of Goddess Parvati thereby benefiting herself and Goddess Parvati. Lord Sarahunaath’s destruction was literally impossible for a stone caught in the lure of the samsara. Then Sri Gangadevi became a true enlightener of her husband, ‘Kokkarne.’ However, when Ganga Devi learned the first version of Kali, the other 1000 incarnations of the Goddess Ganga Devi, as in Lord Sarahunaath, bound her as a stone and carried her to the abyss. But it could not be identified with Lord Sarahunaath and the 33 crore gods, Srimannarayana.


It was quite evident that Sri Parvati and Lord Sarahunaath were here in the great Gulbarga metropolis. But she, too, could not have Lord Sarahunaath by her death. She also dressed up in human form and enshrined Lord Sarahunaath in any form. However, in his second incarnation, Kali held Goddess Parvati in a transparent chisel and placed her in his belly. Sri Kalika Devi carried out his second incarnation, but Sri Parvati could not be brought out of his belly. The Goddess Ganga is also a prisoner in the distance. But even Goddess Parvati could not be identified with Lord Sarahunaath and Sri Mannarayana. It was during this time that Parashiva, too, became Lord Sarahunaath. But the Lord Sarahunaath could not kill the 1001 Kali’. This is because Kali himself attained the power of Parashiva from three successive eras, namely the Krita, Tetra, and Dvapara periods.


Reference:

1. Lord Sarahunaath World maha principality of jurisdiction Monastery

2. Lord Sarahunaath Temples, India

3. www.lordsarahunaath.com

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https://avalanches.com/in/delhi_how_does_automotive_industry_propel_polyester_hot_melt_adhesives_mark4529257_28_09_2022

How Does Automotive Industry Propel Polyester Hot Melt Adhesives Market?


The polyester hot melt adhesives market is predicted to hit $717,152.6 thousand revenue by 2030, ascribed to the rising requirement in the packaging sector for polyester hot melt adhesives with the increasing consumption in the automobile sector. Moreover, under the application segment, the industrial assembly category captures a massive share of the market, facilitated by the extensive consumption of adhesives for bonding electronic and electrical items in various industries.


APAC has the largest share in the polyester hot melt adhesives market, and it is expected to follow the same trend in this decade, ascribed to the massive consumption of these adhesives for industrial assembly applications such as bonding of automotive parts, electronic and electrical products bonding. Moreover, APAC market is also expected to experience a significant rise in sales in the coming years, due to the soaring requirement for polyester hot melt adhesives in the end-uses industries of developing countries such as India, Thailand, Vietnam, and China. In addition, low-cost labor and raw materials also lure the industrialists to establish their units in the region, creating an opportunity for massive FDI from the West.


The increase in consumption of polyester hot melt adhesives is ascribed to the rise in preference for lightweight automobiles, resulting in polyester hot melt adhesives market boom. Moreover, the automobile industry depends on mechanical fasteners such as welds, bolts, and nuts to bond automotive components and parts. The surge in using such accessories results in rising in vehicles’ weight, and hence affects fuel efficiency. Therefore, massive adoption of lightweight vehicles has been witnessed resulting in market proliferation.


In the last few years, the polyester hot melt adhesives market players have entered into strategic agreements to expand their consumer base. For example, Bühnen GmbH & Co. KG partnered with GLS Products LLC in the U.S. to expand the business in North America, in September 2019. The key players in the market are Mitsubishi Chemical Corporation, Sipol S.p.a., Evonik Industries AG, and Bostik S.A.


Therefore, the industrial application of the polyester hot melt adhesives causes the market boom due to its wide usage across various industries, more specifically in packaged food and automotive industry.


Read more: https://www.psmarketresearch.com/market-analysis/polyester-hot-melt-adhesives-market


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https://avalanches.com/in/hangal_who_is_lord_parvathi_sarahunaath_is_there_lord_sarahunaath_is_a_lord_4510608_27_09_2022
https://avalanches.com/in/hangal_who_is_lord_parvathi_sarahunaath_is_there_lord_sarahunaath_is_a_lord_4510608_27_09_2022
https://avalanches.com/in/hangal_who_is_lord_parvathi_sarahunaath_is_there_lord_sarahunaath_is_a_lord_4510608_27_09_2022
https://avalanches.com/in/hangal_who_is_lord_parvathi_sarahunaath_is_there_lord_sarahunaath_is_a_lord_4510608_27_09_2022
https://avalanches.com/in/hangal_who_is_lord_parvathi_sarahunaath_is_there_lord_sarahunaath_is_a_lord_4510608_27_09_2022

Who is Lord Parvathi Sarahunaath? Is there Lord Sarahunaath is a Lord Parvathinaath?


If there was any female deity sitting next to Lord Sarahunath, it could have been Parvati or some other deity. That is, if any female deity sits next to Sarahunath like Shiva Parvati, it is called Parvathinath or Parvati Sarahunath Mandir. That means if any deity sits next to Sarahunaath as Sarvamangali, she is Parvati for Sarahunath. Or if Goddess Parvati herself comes and sits next to Sarahunath, it is called Shiva Parvati Mandir. But if there is a Shiva Linga in front of the same Shiva Parvati, it cannot be called Shiva Parvati Mandir. Instead it is known as Parvati Sarahunaath Mandir or Parvatinath Mandir.


What is lord Sarahunaath pen name?


As both Uma and Suma are Parvati Devi and Ganga Devi herself, Sarahunaath also named her poetic or pen name "Uma Suma" in their memory and undying love.


Who is lord Sarahunaath beloveds?


Lord Sarahunaath have two beloveds. Who one is goddess Parvathi and second Gangadevi. As a result of eight years of long penance for Lord Sarahunaath, Enlightenment, the mistress Umadevi joined Kali’s Abdomen. Sri Parvati did not open the incarnation of the Goddess. The main reason for this was Kali’s shouting and angers. Lord Sarunatha was long convinced that Kali would be left with the fruits of eight years of penance and Hypnotize. Parvati Devi was not in touch with Kali when she was real. In any case, in my era, Goddess Parvati was also in the form of nervousness, and she devised all sorts of machinations and intrigues to leave her alone. At the same time, Kali burst into the rain with a flash of lightning and killed Parvathi’s house. He held her in his belly. He kept her soul in a transparent sheath in his belly.


As Kali immortalizes Parvati, Goddess Parvati does not open the real form of Goddess Parvati if she is not immortal. Even Lord Sarahunaath does not realize his true nature. But now Goddess Parvati somehow never married a nervous man on Earth. But if the wedding does not happen, it is sure to die. But for Kali herself, the death of Goddess Parvati thereby benefiting herself and Goddess Parvati. Lord Sarahunaath’s destruction was literally impossible for a stone caught in the lure of the samsara. Then Sri Gangadevi became a true enlightener of her husband, ‘Kokkarne.’ However, when Ganga Devi learned the first version of Kali, the other 1000 incarnations of the Goddess Ganga Devi, as in Lord Sarahunaath, bound her as a stone and carried her to the abyss. But it could not be identified with Lord Sarahunaath and the 33 crore gods, Srimannarayana.


It was quite evident that Sri Parvati and Lord Sarahunaath were here in the great Gulbarga metropolis. But she, too, could not have Lord Sarahunaath by her death. She also dressed up in human form and enshrined Lord Sarahunaath in any form. However, in his second incarnation, Kali held Goddess Parvati in a transparent chisel and placed her in his belly. Sri Kalika Devi carried out his second incarnation, but Sri Parvati could not be brought out of his belly. The Goddess Ganga is also a prisoner in the distance. But even Goddess Parvati could not be identified with Lord Sarahunaath and Sri Mannarayana. It was during this time that Parashiva, too, became Lord Sarahunaath. But the Lord Sarahunaath could not kill the 1001 Kali’. This is because Kali himself attained the power of Parashiva from three successive eras, namely the Krita, Tetra, and Dvapara periods.


Reference:

1. Lord Sarahunaath World maha principality of jurisdiction Monastery

2. Lord Sarahunaath Temples, India

3. www.lordsarahunaath.com

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Increasing Population Leading to Medical Display Monitor Market Growth


For more insights:- https://www.psmarketresearch.com/market-analysis/medical-display-monitor-market


Display monitors are among the most essential and easily recognizable equipment types at healthcare settings. A lot of the diagnoses these days are made by doctors based on what they see on these monitors. From the results of imaging studies and vital sign readings to what is going on inside the body, as the surgeon operates, everything can be seen on such screens. With the increasing population around the world, the demand for healthcare services is constantly going up. With more medical centers being set up in this regard, the procurement of display monitors is also rising.


This is why among all the resolution ranges these appliances come in — up to 2 MP, 3 MP–4 MP, 5 MP–8 MP, and above 8 MP — the demand for 5–8 MP monitors is expected to increase the fastest in the coming years. Similarly, of the monochrome and color variants, color variants are more commonly seen in healthcare settings, as they offer better visualization. The better the picture, the more confident the doctor can be in making a diagnosis, and in turn, more effective would be the treatment prescribed.


Apart from diagnosis, display monitors are also used in surgery and clinical applications. Among these, diagnosis has been the largest application area of these screens, without which X-ray, ultrasound, positron emission tomography (PET), computed tomography (CT), and magnetic resonance imaging (MRI) systems are unimaginable today. Apart from radiological machines, even a large number of systems which analyze the blood and urine for abnormal substances are integrated with display monitors, for quick medical intervention.


Along with diagnosis, the usage of display monitors is also rapidly rising in surgeries, especially with the advent of minimally invasive surgeries (MIS) and hybrid operating rooms (OR). A hybrid OR has a number of monitors, attached to imaging modalities, which assist surgeons in complex operational procedures. Apart from imaging systems, the vital sign monitor in ORs too have a monitor, so if any anomaly is detected in any of the waveforms, doctors can immediately do the needful.


Therefore, with the increasing demand for such systems, companies providing them have upped their product development activities. For instance, CuratOR LX550W, a 55-inch 4K ultra-high-definition (UHD) monitor, was launched by EIZO GmbH in October 2017, for interventional endoscopy and radiology. In June 2016, the company had acquired Panasonic Healthcare Co. Ltd.’s endoscope monitor business, to offer 4K and 3D endoscopy monitors for ORs. Similarly, LG Display Co. Ltd. introduced a transparent and flexible organic light-emitting diode (OLED) monitor, in a 77-inch size, in June 2017.


The increasing usage of display monitors in ORs is also credited to the rising preference for MISs, which is also why North America has been the largest medical display monitor market till now. According to the American Society of Plastic Surgeons, 17.7 million MISs were performed in the U.S. in 2018, which was an increase of 2% from previous year. In the coming years, the highest rise in the procurement of medical display monitors is predicted in Latin America (LATAM), as a result of the advancing healthcare infrastructure in the region.


Hence, as the number of medical centers and patients increase, so will the sale of display monitors.


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कोई बात नही.....

कोई बात नही अगर तुम्हारी ख्वाहिशें बड़ी और सैलरी थोड़ी कम है

कोई बात नही अगर तुम्हारे Favourite person से फिलहाल तुम्हारी बातें बंद है

कोई बात नही अगर अभी भी तुम्हे बाहर निकलने के लिए Parents की permission चाहिए होती हैं

कोई बात नहीं अगर वक्त के साथ साथ उतनी तेज तुम भाग नही पा रहे हो .......


पर कैसा लगेगा अगर मैं कहूं तुम्हे तुम बिल्कुल ठीक जा रहे हो, सबकी कहानी तुम्हारी कहानी की तरह ही है, ये मत समझना की ऐसा तुम्हारे साथ ही होता है .


कोई बात नहीं अगर तुम्हे अभी मेरी भी बात पसन्द नही आ रही, इसे सुनने के बाद तुम्हारे चेहरे पे Smile 😊 आनी चाहिए.....


पर कोई बात नहीं अगर नहीं आ रही.......SACCHI


_ राज

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Doston Chita Dharti ka Sabse Tej Janwar hai, yah palak jhapakte hi 100 kilometer prati ghante se adhik ki raftar pakad sakta hai

फिर वी ek visheshta inke dusre gunon ko kam kar deti hai,

patla aur halka sharir hone ke Karan hi chita itni Tej दौर pata hai,


kintu yah patla aur halka sharir chita ko Anya badi billiyon ki tulna mein kam shaktishali bhi _ banaa deta hai_ yahi vajah hai ki Chita ko

na chei maarte hue Apne shikar ko teji se todkar pakad to leta hai kintu shikar ko maar dalne ke liye

तो उल्टा चीते की ही जान के लाले पड़ जाते हैं।


या इस वीडियो में यह माता चीता कई दिनों से शिकार की तलाश में थी, सिर्फ यही नहीं बल्कि इसके छोटे बच्चे भी भूख से व्याकुल थे, इसलिए दौड़ लगाती है ।


और एक बड़े बेशक नदीम पाला को पकड़ लेती है इसके छोटे शिकार में अपनी मां की मदद करते दिखाई पड़ रहे हैं !


[ बड़े आकार का नर इंपाला chiyay से अधिक ताकतवर हो सकता है और , सबसे बड़ी बात यह किसके पास अपनी रक्षा के लिए करीब 3 फीट लंबे और भेद होते हैं , चिता पर हमला बोल देता है इस हमले को यह कमजोर , नहीं संभाल पाती काफी दूर तक चीता को घसीटते हुए ले जाता है और इसका एक शिकारी chor kar antata pichay आना पड़ा।


[अभी आप शिकायत नहीं कर पाएगी एक अन्य वीडियो में भी आप एक है काम वाले चिता को देख सकते हैं _ ]


यह भी छोटे गांव को वाली उस्मा धारिता है और इसकी टांग घायल होने का सीधा अर्थ यह है कि अब यह तेजी से नहीं दौड़ पाएगी और शिकार भी नहीं कर पाएगी


मतलब ना सिर्फ यह खुद बल्कि जल्द ही इसके चलते मारे जाएंगे वैसे ही यह चलते मारे जाए किंतु के लिए सबसे बड़ा खतरा शेर होते हैं विचारों को मार डालते हैं ऐसा क्यों होता है।

[email protected]__________________________________________________


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https://avalanches.com/in/jagraon_hungerdeficiency_free_india_equal_access_to_nutrition4429660_23_09_2022

Hunger:-Deficiency Free India: Equal Access to Nutrition!


What is hunger?

According to politics, humanitarian aid, and the social sciences, hunger is the need for a sustained period of nutrients for a person’s physical or financial capabilities to eat enough food.


*Hunger in India* .

India has been facing serious hunger crisis for a long time. As per the Global Hunger Index report 2020 which was released by Washington-based International Food Policy Research Institute (IFPRI), India has slipped down to 101th rank among 116 countries based on three key indicators:-


(i) Prevalence of wasting and stunting among children under 5 years of age


(ii) Child mortality under 5


(iii) The proportion of undernourished in the population.


*Causes of hunger in India.*


✓Failures to invest in agriculture, supporting small farms, to name a few are some of the causes which have stunted the smooth sail of India, a fast-growing economy in the world. The rate of malnutrition is worse in India.

✓Failure of food schemes. A disparity between the real execution of schemes for the greater good of citizens.

✓The inefficient management of food available. According to a report by the United Nations, 40% of the total produce is either lost or wasted.

✓Poverty is one of the most critical factors that contribute to the prevailing hunger crisis in India. The shocking fact remains that two-thirds of the people living in India are poverty-stricken.


*How can we improve?*

India needs a practical multi-dimensional approach to win over the food crisis.

✓Government must ensure that small and marginal farmers can grow more crops in a year.

✓The government should be implemented schemes to reach the lowest strata of uneducated, unaware and unemployed citizens like One Nation, One Ration Card.

✓Last but not least people contribute to provide food to needed people.

Hamri pachan NGO also work on hungry crirs. Volunteer contect with NGO and give own contribution.


*"Alone we can do so little; together we can do so much."* – _Helen Keller_


So start with Hamari Pahchan NGO to overcome the hungry and make healthy India .


Thanks

Beant kaur

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